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ॐ नम: शिवाय      ॐ नम:शिवाय     ॐ नम: शिवाय      ॐ नम:शिवाय     ॐ नम: शिवाय
ॐ नम: शिवाय
 
 
 
 
 
 
श्री शिवयोगी रघुवंश पुरी जी
     
 
मेरे गुरु देव
 
 
 
 
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  1. शिवनामसुधा
  2. शिवलि रहस्य
  3. शिवभत्तफचरित
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  5. शिवकथामृत
  6. शिवरहस्य
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देवों के देव महादेव हैं अद्वितीय...
भारत के गरिमायुक्त ग्रंथ शिवपुराण में शिव और शक्ति में समानता बताई गई है और कहा गया है कि दोनों को एक-दूसरे की जरूरत रहती है। न तो शिव के बिना शक्ति का अस्तित्व है और न शक्ति के बिना शिव का। शिव पुराण में यह भी दर्ज है कि जो शक्ति संपन्न हैं, उनके स्वरूप में कोई अंतर नहीं मानना चाहिए। भगवती पराशक्ति उमा ने इंद्र-आदि समस्त देवताओं से स्वयं कहा है कि ‘मैं ही परब्रह्म, परम-ज्योति, प्रणव-रूपिणी तथा युगल रूप धारिणी हूं। मैं ही सब कुछ हूं। मुझ से अलग किसी का वजूद ही नहीं है। मेरे गुण तर्क से परे हैं। मैं नित्य स्वरूपा एवं कार्य कारण रूपिणी हूं।’ स्पष्ट है कि विविध पुराणों में विशुद्ध रूप से वर्णित शिव-शक्ति समस्त चराचर के लिए मंगलकारी और कल्याणकारी यानी शुभ है।
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हरिद्वार : दुनिया का सबसे प्राचीन धार्मिक मेला महाकुंभ इस साल दुनिया का सबसे बड़ा मेला हो सकता है। वेदों में उल्लिखित परंपरा के अनुसार लाखों हिंदू श्रद्धालु मोक्ष पाने के लिए महाकुंभ मेले के दौरान स्नान करते हैं। यह मेला प्रयाग (इलाहाबाद), हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में आयोजित किया जाता है। इस साल इस मेले क� � आयोजन हरिद्वार में हो रहा है।

चार महीने तक चलने वाला महाकुंभ मेला दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा के तट पर 14 जनवरी से यह मेला शुरू होगा। हरिद्वार महाकुंभ की महिमा इसलिए भी ज्यादा मानी जाती है क्योंकि यह भगवान शंकर के निवास कैलाश पर्वत का प्रवेश द्वार माना जाता है। इसके मुकाबले सिर्फ इलाहाबाद के कुंभ में ही भारी भीड़ होती है क्योंकि वहां गंगा, यमुना और पौराणिक नदी सरस्वती का संगम है। कुंभ के प्रति गहरी आस्था न केवल हजारों साल से बनी हुई है, बल्कि इसका प्रभाव दुनिया भर में बढ़ रहा है। सातवीं शताब्दी में ह्वेन सांग से लेकर 19वीं शताब्दी में मार्क ट्वेन और 20वीं शताब्दी में बहुत से विद्वानों ने महाकुंभ मेले का चमत्कृत होकर वर्णन किया है।

शिवभक्ति की प्रंशसा
श्री गणेश जी की मैं वन्दना करता हूं ताकि मेरा मनोरथ निर्विघ्न पूर्ण हो। मैं शिव-पार्वती की गोद में खेलते कार्तिक स्वामी की उपासना करता हूं। वासना- अंधकार के
निवारकर शिवभक्त-चरणधूलि को मेरा सदा प्रणाम है। श्रीपति ,ब्रह्मा ,सूर्य, स्कन्द, इन्द्रादि देवो की ओर उपमन्यु आदि मुनियो की मैं हमेशा वन्दना करता हूं।
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  कार्यक्रम
 
  शिव कथा
    मकर संक्राति
    शिव नाम प्रवचन
    महा शिव रात्रि
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संर्पक

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